DIGITAL FINANCIAL LITERACY [BANKING AWARENESS]

हैलो दोस्तों अब हम CCC के Chapter “DIGITAL FINANCIAL LITERACY [BANKING AWARENESS]” के बारे में चर्चा करेंगे। इसके अंतर्गत आपको  जो भी discuss करना हो या किसी भी प्रकार का Doubt हो  तो आप Comment के माध्यम से बात कर सकते हैं।

Thank you

DIGITAL FINANCIAL LITERACY [BANKING AWARENESS]

  • बचत  आवश्यकता क्यों होती है ?
  1. इमरजेंसी एक्सपेंसेस [एक्सीडेंट, इलनेस , डेथ ]
  2. फ्यूचर नीड्स
  3. लार्ज एक्सपेंसेस
  • नकद राशि को घर पर रखने का क्या नुकसान है?
  1.  असुरक्षा
  2. Loss of growth opportunity
  3. No credit eligibility
  • बैंक की आवश्यकता क्यों होती है ?
  1.  लोन
  2. ब्याज के लिए
  3. चैक और डिमांड ड्राफ्ट  के लिए
  4. बचत की आदत को बढ़ावा देने के लिए
  • बैंक में खाता खोलने के लिए कौन कौन से प्रमाण पत्र होने चाहिए ?
  1. एड्रेस कार्ड
  2. पैन कार्ड
  3. वोटर ID कार्ड
  4. ड्राइविंग लाइसेंस
  5. जॉब कार्ड
  6. राशन कार्ड
  • बैंकिंग प्रोडक्ट्स ?
  1. सेविंग बैंक अकाउंट
  2. रिकरिंग डिपोजिट [RD]
  3. फिक्स्ड डिपोजिट
  4. डेबिट कार्ड
  5. एटीएम
  • एजुकेशन लोन – भारत में उच्च शिक्षा के लिए अधिकतम लोन 10 लाख रूपये एवं विदेशो में 20 लाख रूपये है।
  • ओवरड्राफ्ट –इसके अंतर्गत खाते में पढ़े हुए बैलेंस से अधिक राशि निकलने की सुविधा होती है।   व्यक्ति या कंपनी की गुडविल पर आधारित होती है।  एजुकेशन लोन के लिए अप्लाई करने के लिए इण्डिया की गवरमेंट विद्यालक्ष्मी  पोर्टल  पर जा सकते है।
  • Banking instrument – चैक और डिमांड ड्राफ्ट।
  • Indian currency – मुर्दा की पूर्ति के लिए रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने सबसे पहले 1961 में एक कमेटी बनायीं जिसने वर्ष 1977 में मुद्रा पूर्ति के सम्बन्ध में चार केटेगरी पेश की जो निम्न है-
  1. M1 – जनता को उपलब्ध चलन की मात्रा
  2. M2 – M1+ डाक-खानो के बचत बैंको में बचत जमा राशियां
  3. M3 – M1 + बैंको की कुल जमा रशिया
  4. M4 – M3 +डाकघर की कुल जमा रशिया
  • Indian Currency System –नोटों को जारी करने की विधि सन 1956 से रिज़र्व बैंक द्वारा स्वीकार की गयी।  इस प्रणाली के अनुसार नोट जारी करने  वाले विभाग के पास स्वर्ण मुद्रा , विदेशी ऋण पत्र , कुल मिलाकर किसी भी समय 200 करोड़ रूपये  मूल्य से कम नहीं होना चाहिए जिसमे काम से काम 115 करोड़ रूपये का सोना या  कोई अन्य धातु अवश्य होनी चाहिए इस वर्तमान समर्थन व्यवस्था को न्यूनतम प्रारक्षण प्रणाली या न्यूनतम आरक्षित निधि प्रणाली कहते है। भारत में रूपये का चिन्ह 15 जुलाई 2010 से शुरू हुए।  इसे डी. उदय कुमार  ने बनाया।

टकसाल – सिक्कों का उत्पादन करने तथा सोने और चंडी की परख करने एवं तमगो का उत्पादन करने के लिए भारत सर्कार की चार टकसले मुंबई , कोलकाता, हैदराबाद तथा नॉएडा में है।

  1.  संगठित क्षेत्र में रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया शीर्ष संस्था है।   इसके अतिरिक्त सार्वजानिक क्षेत्र , बैंक , निजी क्षेत्र के बैंक , विदेशी बैंक तथा अन्य वित्तीय संस्थाए आती है।
  2. स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया रिज़र्व बैंक के प्रतिनिधि के रूप में उन जगहों  करता है जहाँ रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया का कोई कार्यालय नहीं हो।
  3. रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया का वित्तीय वर्ष 1 जुलाई से 30 जून तक  होता है।

पत्र मुद्रा पर नई भाषा – प्रधानमंत्री कार्यालय के द्वारा रिज़र्व बैंक के मुद्रा विभाग को नए निर्देश जारी किए गए है।  मैथली के साथ भगीपुरी, संथाती , डोगरी और बोडो भाषा को भी अंकन रूपये के नोटों पर किये जाये। अभी तक भारतीय रूपये 17 भाषाओ में ही रूपये का मूल्य लिखा जाता है जबकि भारत के संविधान की 8वी अनुसूची में 22 भाषाओ को मान्यता दी गयी।

  •  प्रधानमंत्री जनधन योजना – इस योजना का शुभारम्भ 28 अगस्त 2014 ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया।  इसके अंतर्गत निम्न प्रकार के लाभ मिलते है –
  1.  जमा पर ब्याज
  2. एक लाख रूपये तक का  दुर्घटना बिमा कवर
  3. न्यूनतम बैलेंस की आवश्यकता नहीं
  4. 5000 रूपये का ओवरड्राफ्ट
  • प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना – इसके अंतर्गत 12 % के वार्षिक प्रीमियम पर २ लाख का बीमा कवर मिलता है।  यह योजना न्यूनतम 18 वर्ष तथा अधिकतम 70 वर्ष की आयु के व्यक्ति के लिए उपलब्ध है।
  • प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना – इसमें 330 रूपये वार्षिक प्रीमियम पर 2 लाख रूपये तक का जीवन योजना कवर मिलता है।  यह वार्षिक आधार पर चलती है।  जिसकी न्यूनतम आयु 18 वर्ष एवम अधिकतम आयु 50 वर्ष है।
  • अटल पेंशन योजना – इस योजना का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों जिनकी आयु 18 वर्ष तथा अधिक आयु 40 वर्ष हो को सर्कार की पेंशन लाभ गारेंटी प्रदान करता है।  इस योजना से जुड़ने वाले व्यक्ति 60 वर्ष की आयु के बाद कम से कम 1 हज़ार रूपये तथा अधिकतम 5000 रूपये वर्षो तक जमा करनी होती है।  और व्यक्ति के द्वारा 20 वर्ष तक। इसका लाभ उन्ही व्यक्तियों को ही मिल पाएगा जो 31 Dec 2015 तक इससे जुड़े है।

M – Micro 

U – Units 

D – Development 

R – Refinance

A – Agency 

इसकी घोषणा वर्ष 2015 के बजट में की गई है जिसके लिए 20 हज़ार करोड़ का कोष निर्धारित किया गया।  इसमें 3 हज़ार करोड़ की ऋण गारंटी राशि की घोषणा की गयी है। मुद्रा बैंक से देश के करीब 5 करोड़ 77 लाख छोटे कारोबारियों को फायदा मिलेगा।  छोटी मनुफेक्चरिंग यूनिट, दुकानदार, सब्जी बेचने वाला एवं सैलून आदि को इस योजना के तहत लोन मिलेगा।

इस योजना के अंतर्गत तीन प्रकार के लोन दिए जाते है –

  1. शिशु ऋण – 50000 तक का लोन।
  2. किशोर ऋण -50000 से 5 लाख तक का लोन।
  3. तरुण ऋण – 5 लाख से 10 लाख।

नेशनल पेन्सन सिस्टम /स्कीम –यह योजना 1 JAN 2004 से आरम्भ हुई।   सशस्त्र होना बलों के आलावा  कोई भी भारतीय शामिल हो सकता है।  1 MAY 2009 से यह स्वेछिक आधार पर असंगठित क्षेत्र के कामगारों सहित देश के सभी नागरिको को प्रदान की जाती है।  इस योजना के सहारे साहूकार स्वयं को पेन्सन की ज़िम्मेदारी से मुक्त करने की कोशिश की है।

INSURANCE – एक ऐसी व्यवस्था जिसमे कोई बीमा कम्पनी अपने ग्राहक को किसी भी प्रकार के नुकसान , दुर्घटना , बीमारी मृत्यु आदि के संदर्भ में मुआवजा देने की गारंटी देती है।

TYPE OF INSURANCE –  

  1. लाइफ इन्सुरेंस – जीवन बिमा किसी व्यक्ति एवं बीमा कंपनी के बीच एक अनुबंध होता है जिसमे बीमा धारक प्रीमियम अमाउंट का भुगतान करता है ताकि  वदले में कंपनी किसी भी दुर्घटना की स्थिति में ग्राहक  वित्तीय सुरक्षा प्रदान कर सके।
  2. नॉन लाइफ इन्सुरेंस – यह बीमा की ऐसी पद्धति है जिसके अंतर्गत किसी वस्तु की हानि की स्थिति  कंपनी द्वारा क्षतिपूर्ति राशि दी जाती है।  सामान्यतः यह एक वर्ष के लिए सुरक्षा कवरेज प्रदान करती है  इसके लिए यह एक  मुफ्त राशि एक ही बार देती है।

भारत में प्रतिभूति मुद्रण स्थान –

About the Author: virag

Hello!!!... दोस्तों, आप सभी का इस ब्लॉग पर स्वागत है मेरा नाम विराग सम्बरिया है, और मैं पेशे से एक Computer Teacher हूँ मैं सन २०१० से यह कार्य कर रहा हूँ, और मुझे इस कार्य को करने में अत्यंत संतुष्टि प्राप्त होती है, एक तो इसके माध्यम से मैं अपने ज्ञान और अनुभव का लाभ अन्य लोगों तक पहुंचा पाता हूँ और दूसरा इसके माध्यम से मैं खुद भी अपने ज्ञान में वृद्धि करता हूँ. Thanks a Lot..... आपके इस Blog को Visit करने पर सहृदय धन्यवाद् !!!!!!

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