January, 2016 M1-R4: IT TOOLS AND BUSINESS SYSTEMS (Solved)

5.a.

Convert 10000101 into a decimal number.
Answer : 133

b.

Operating System के प्रमुख कार्य निम्‍नलिखित हैं-

  • प्रोग्राम को लोड एवं क्रियान्वित करना
  • प्रोसेसे मैनेजमेंट (Process Management)
  • मेन मैमोरी प्रबंधन (Main Memory Management)
  • फाइल प्रबंधन (File Management)
  • सेकंडरी संग्रह प्रबंधन (Secondary Storage Management)
  • I/O सिस्‍टम मैनेजमेंन्‍ट (I/O System Management)

(A) प्रोग्राम को लोड एवं क्रियान्वित करना

ऑपरेटिंग सिस्‍टम (Operating System) हमें सिस्‍टम एवं एप्‍लीकेशन प्रोग्रामों को मैमोरी से लोड करके क्रियान्‍वयन के दौरान आवश्‍यक सर्पोटिंग (Supporting) फाइलें भी प्रदान करता हैं।

(B) प्रोसेस मैनेजमेंट (Process Management)

प्रोसेस मैनेजमेंट के संदर्भ में ऑपरेटिंग सिस्‍टम का Creation, Deletion, Suspension एवं Resumption आदि सम्‍पन्‍न कराना।

C) मेन मैमोरी प्रबंधन (Main Memory Management)

इसके अर्न्‍तगत निम्‍नलिखित कार्य किये जाते हैं-

  1. मैमोरी का कौन-सा भाग इस समय प्रोग्राम में हैं, एवं उसे किस प्रोसेस ने प्रोग्राम में लिया हुआ हैं, आदि सूचनाएं ऑपरेटिंग सिस्‍टम (Operating System) के पास होती हैं।
  2. आवश्‍यकतानुसार मैमोरी स्‍पेस को Allocate एवं Deallocate करना।

(D) फाइल प्रबंधन (File Management)

फाइल प्रबंधन (File Management)  के संदर्भ में ऑपरेटिंग सिस्‍टम (Operating System) के निम्‍नलिखित कार्य हैं:-

  1. फाइल व डायरेक्‍ट्री का Creation, Deletion,  एवं Manipulation का कार्य सम्‍पन्‍न कराना।
  2. फाइलों का सेंकडरी संग्रह पर मैपिंग (Mapping) करना।
  3. फाहलों का स्‍टेबल संग्रह पर बैकअप लेना।

(E) सेकंडरी संग्रह प्रबंधन (Secondary Storage Management)

ऑपरेटिंग सिस्‍टम निम्‍नलिखित कार्य सम्‍पन्‍न कराता हैं।

  1. Free Space का प्रबंधन
  2. Storage allocation
  3. Disk Scheduling

(F) I/O सिस्‍टम मैनेजमेंन्‍ट (I/O System Management)

ऑपरेटिंग सिस्‍टम (Operating System) I/O डिवाइसेज को प्रभावशाली रूप में उपयोग करने में मदद करता हैं, एवं उसकी जटिलताओं से यूजर को मुक्‍त करता हैं। ऑपरेटिंग सिस्‍टम विभिन्‍न हार्डवेयर डिवाइसेस (hardware devices) के डिवाइस ड्राइवर (device drivers) की उपलब्धता भी सुनिश्चित करता हैं।

(G) ऑपरेटिंग सिस्‍टम के अन्‍य कार्य (Additional Function Of Operating System)

  1. रिसोर्स एलोकेशन (Resource Allocation) :- ऑपरेटिंग सिस्‍टम (Operating System) सभी सिस्‍टम रिसोर्सेज (जैसे CPU, मैमोरी, पेरीफेरल आदि) को प्रोसेसर को इस प्रकार allocate करता हैं, कि सभी रिसोर्सेज का अच्‍छे ढ़ग से उपयोग हो सके।
  2. एप्‍लीकेशन प्रोग्राम को क्रियान्वित करना।
  3. यूटीलिटी प्रोग्रामों को क्रियान्वित कराना।
  4. ऐरर डिटेक्‍शन।
  5. कम्‍यूनिकेशन तथा नेटवर्किग।

c.

Education:

शिक्षा के क्षेत्र में, मल्टीमीडिया का बहुत महत्व है। स्कूलों के बारे में विशेष रूप से बात करते हुए, बच्चों के लिए मल्टीमीडिया का उपयोग बहुत महत्वपूर्ण है। यह शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। यहां तक ​​कि परंपरागत तरीके से हमने शिक्षा देने के लिए ऑडियो का इस्तेमाल किया था, जहां चार्ट, मॉडल आदि का इस्तेमाल किया गया था। आजकल क्लास रूम की ज़रूरत उस पारंपरिक पद्धति तक सीमित नहीं है बल्कि इसे अब ऑडियो और विज़ुअल मीडिया की आवश्यकता है। मल्टीमीडिया एक सिस्टम में इन सभी को इंटिग्रेट करता है।

इन सभी ने कंप्यूटर आधारित प्रशिक्षण की एक विस्तृत श्रृंखला के विकास को बढ़ावा दिया है।

Entertantment:

आजकल आप जो movie देखते हैं उसमें सबसे ज्यादा multimedia का उपयोग किया जाता है| Movie और game बनाने में Computer graphics का बहुत ही महत्वपूर्ण role होता है जो की Multimedia को बढ़ावा देता है मतलब की Movie और game में Multimedia का उपयोग बहुत ही ज्यादा होता है जिसके कारण Multimedia का growth increase होता है|

Movie में Multimedia का उपयोग audio और video में effect change करने में होता है| आजकल Multimedia के हेल्प से Video में बहुत ज्यादा action दे दिया जाता है जो की एकदम reality के जैसा प्रतीत होता है| Video या audio को बेहतर बनाने के लिए multimedia का प्रयोग किया जाता है|

Game में Multimedia का उपयोग computer graphics के द्वारा animation और video बनाने में होता है| Computer graphics के द्वारा हम किसी भी प्रकार का game develop कर सकते हैं| Game में 3D Animation, action इत्यादि available होते हैं जो की केवल multimedia के द्वारा ही possible है|

6.a.

Basic Components of A Computer System/ Block Diagram
(कंप्यूटर के अवयव और ब्लाक डायग्राम)

1. Input Device

Input Device वे Device होते है जिनके द्वारा हम अपने डाटा या निर्देशों को Computer में Input करा सकते हैं| Computer में कई Input Device होते है ये Devices Computer के मस्तिष्क को निर्देशित करती है की वह क्या करे? Input Device कई रूप में उपलब्ध है तथा सभी के विशिष्ट उद्देश्य है टाइपिंग के लिये हमारे पास Keyboard होते है, जो हमारे निर्देशों को Type करते हैं|

Input Device वे Device है जो हमारे निर्देशों या आदेशों को Computer के मष्तिष्क, सी.पी.यू. (C.P.U.) तक पहुचाते हैं|”

Input Device कई प्रकार के होते है जो निम्न प्रकार है –

  • Joystick
  • Trackball
  • Light pen
  • Touch screen
  • Digital Camera
  • Scanner
  • Digitizer Tablet
  • Bar Code Reader
  • OMR
  • OCR
  • MICR
  • ATM
  • Keyboard
  • Mouse etc
  • 2. C.P.U.

C.P.U का पूरा नाम सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit) हैं| इसका हिंदी नाम केन्द्रीय संसाधन इकाई होता हैं| यह Computer का सबसे महत्वपूर्ण भाग होता हैं| अर्थात इसके बिना Computer सिस्टम पूर्ण नहीं हो सकता है, इससे सभी Device जुड़े हुए रहते है जैसे- Keyboard, Mouse, Monitor आदि | इसे Computer का मष्तिस्क (Mind) भी कहते है| इसका मुख्य कार्य प्रोग्राम (Programs) को क्रियान्वित (Execute) करना है इसके आलावा C.P.U Computer के सभी भागो, जैसे- Memory, Input, Output Devices के कार्यों को भी नियंत्रित करता हैं|

C.P.U (Central Processing Unit) के तीन भाग होते है –

(a) A.L.U (Arithmetic Logic Unit)

एरिथ्मेटिक एवं लॉजिक यूनिट को संक्षेप में A.L.U  कहते हैं| यह यूनिट डाटा पर अंकगणितीय क्रियाएँ (जोड़, घटाना, गुणा, भाग) और तार्किक क्रियायें (Logical operation) करती हैं| A.L.U Control Unit से निर्देश लेता हैं| यह मेमोरी (memory) से डाटा को प्राप्त करता है तथा Processing के पश्चात सूचना को मेमोरी में लौटा देता हैं| A.L.U के कार्य करने की गति (Speed) अति तीव्र होती हैं| यह लगभग 1000000 गणनाये प्रति सेकंड (Per Second) की गति से करता हैं| इसमें ऐसा इलेक्ट्रॉनिक परिपथ होता है जो बाइनरी अंकगणित (Binary Arithmetic) की गणनाएँ करने में सक्षम होता हैं|

(b) Memory

यह Input Device के द्वारा प्राप्त निर्देशों को Computer में संग्रहण (Store) करके रखता है इसे Computer की याददाश भी कहाँ जाता है| मानव में कुछ बातों को याद रखने के लिये मष्तिस्क होता है, उसी प्रकार मेमोरी (Memory) हैं| यह मेमोरी C.P.U का अभिन्न अंग है, यह एक संग्राहक उपकरण (Storage Device) हैं| अतः इसे Computer की मुख्य मेमोरी (Main memory), आंतरिक मेमोरी (Internal Memory), या प्राथमिक मेमोरी (Primary Memory) भी कहते हैं|

(c) C.U.

C.U. का पूरा नाम कंट्रोल यूनिट (Control Unit) होता हैं| C.U. हार्डवेयर कि क्रियाओ को नियंत्रित और संचालित करता हैं| यह Input, Output क्रियाओ को नियंत्रित (Control) करता है साथ ही Memory और A.L.U. के मध्य डाटा के आदान प्रदान को निर्देशित करता है यह प्रोग्राम (Program) को क्रियान्वित करने के लिये निर्देशों को मेमोरी से प्राप्त करता हैं| निर्देशों को विधुत संकेतों (Electric Signals) में परिवर्तित करके यह उचित डीवाइसेज तक पहुचता हैं|

3. Output Device

Output Device वे Device होते है जो User द्वारा इनपुट किये गए डाटा को Result के रूप में प्रदान करते हैं |

Output Device के द्वारा कंप्यूटर से प्राप्त परिणामो (Result) को प्राप्त किया जाता है इन परिणामों को प्राय: डिस्प्ले डीवाइसेज (स्क्रीन) या प्रिंटर के द्वारा User को प्रस्तुत किया जाता हैं| मुख्य रूप से Output के रूप में प्राप्त सूचनाएं या तो हम स्क्रीन पार देख सकते है या प्रिंटर से पेज पर प्रिंट कर सकते है या संगीत सुनने के लिये आउटपुट के रूप में स्पीकर का उपयोग कर सकते हैं, Output Device कई प्रकार के होते है जैसे

Monitor

Printer

Plotter

Projector

Sound Speaker

b.

1.अपने वर्ड डॉक्यूमेंट में हेडर और फूटर को जोड़ने के लिए निम्नलिखित स्टेप्स को फॉलो करें:-अपने एमएस वर्ड डॉक्यूमेंट में उपर दिख रहे Insert टैब के अंदर जाएं।

2.यहाँ आपको हेडर और फूटर दोनों ही कमांड दिखेंगे। आप किसी पर भी क्लीक कर सकते हैं जिसके बाद एक ड्रापडाउन मेनू दिखेगा।

3.अगर आप खाली हेडर या फूटर डालना चाहते हैं तो उस ड्रापडाउन मेनू के अंदर Blank पर क्लीक करें या फिर दिए गये आप्शन में से चुने। 
4. इसके बाद आपको रिबन के अंदर डिजाईन टैब दिखेगा और डॉक्यूमेंट में हेडर था फूटर दोनों ही जुड़ जाएँगे।
5.अब हेडर और फूटर में जरूरी जानकारियाँ डालें। ये जानकारियां वो चीजें हो सकती है जो आप चाहते हैं कि आपके डॉक्यूमेंट के हर पेज पर दिखे।

6.अगर आपने ये जानकारियाँ दाल दी है तो डिजाईन टैब के अंदर जाकर Close Header and Footer दबाएँ जिसके बाद ये विंडो हट जाएगा। याद रखें किये हटने के बाद भी ये आइकॉन दिखता रहेगा लेकिन लॉक्ड होगा। अगर आप उसे पुनः एडिट करना चाहते हैं तो डबल क्लीक कर के ऐसा कर सकते हैं।

c.

Slide Transition Effect

एक Presentation में एक से अधिक स्लाईडस होती है। यह effect दो स्लाईड के बीच में लगाया जाता है। या स्लाईड स्टार्ट होने के पहले आता है। इससे यह पता लगता है। कि एक स्लाईड खत्म हो रही है। और नई स्लाईड आ रही है। एक स्लाईड में एक ही Transition Effect लगाया जाता है। इसमें इसकी स्पीड एवं साउड को भी सेट किया जाता है। इसमें विभिन्न प्रकार के साउंड होते है। आवाज को रिकार्ड करके भी इसमें सेट किया जा सकता है। Effect को क्लिक करने पर शो होना है। या Automatically शो होना है। यह निर्धारित किया जाता है। Automatically में यह निर्धारित किया जाता है। कि यह Effect कितने समय बाद शो होना है। इसी को स्लाईड Rehearsal Time कहा जाता है।

Slide Transition Effect set करना:-

Slide Show →  Slide Transition पर क्लिक करने पर निम्न डायलाग बाक्स आता है।

05transition

7.c

How to Use Cell Reference in MS Excel 2013

एक सेल संदर्भ किसी वर्कशीट पर सेल या सेल की एक श्रृंखला को संदर्भित करता है और इसे सूत्र में उपयोग किया जा सकता है ताकि Microsoft Office Excel उन मानों या डेटा को ढूंढ सके जिन्हें आप गणना करना चाहते हैं।

MS Excel 2013 में दो प्रकार के सेल संदर्भ (Cell reference) हैं: relative और absolute। जब कॉपी (copy) बनाई जाती है तो relative और absolute संदर्भ (Reference) अलग-अलग व्यवहार करते हैं। जब किसी सूत्र को किसी अन्य Cell में कॉपी किया जाता है तो संबंधित संदर्भ (Reference) बदल जाते हैं। दूसरी तरफ, पूर्ण संदर्भ (absolute Reference) स्थिर रहते हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनकी कॉपी (copy) बनाई गई है।

Absolute reference-

एक डॉलर के चिह्न ($) के अतिरिक्त एक सूत्र में एक पूर्ण संदर्भ (Absolute Reference) नामित किया गया है। यह कॉलम संदर्भ (Column Reference), पंक्ति संदर्भ (Row Reference), या दोनों से पहले हो सकता है।

पूर्ण संदर्भ (Absolute Reference) वाले सूत्र बनाने के दौरान आप आमतौर पर $ A $ 2 प्रारूप का उपयोग करेंगे। अन्य दो प्रारूपों का उपयोग बहुत कम बार किया जाता है। फ़ॉर्मूला लिखते समय, आप सापेक्ष और पूर्ण सेल संदर्भों के बीच स्विच करने के लिए अपने कीबोर्ड पर F4 कुंजी दबा सकते हैं। यह एक पूर्ण संदर्भ (Absolute Reference) जल्दी से डालने का एक आसान तरीका है।

Relative Reference- 
डिफ़ॉल्ट रूप से, सभी सेल संदर्भ (Cell reference) सापेक्ष संदर्भ (relative Reference) होते हैं। जब कई cells में कॉपी बनाई जाती है, तो वे पंक्तियों और स्तंभों की सापेक्ष स्थिति के आधार पर बदलती हैं। उदाहरण के लिए, यदि आप फॉर्मूला = A1 + B1 को पंक्ति 1 से पंक्ति 2 में कॉपी करते हैं, तो सूत्र = A2 + B2 बन जाएगा। जब भी आपको कई पंक्तियों या स्तंभों में समान गणना दोहराने की आवश्यकता होती है। तब सापेक्ष संदर्भ (relative Reference) विशेष रूप से सुविधाजनक होते हैं |

Mixed Reference-एक मिश्रित सेल संदर्भ या तो एक पूर्ण स्तंभ और सापेक्ष पंक्ति या पूर्ण पंक्ति और सापेक्ष स्तंभ है। जब आप कॉलम अक्षर से पहले $ जोड़ते हैं तो आप एक पूर्ण कॉलम बनाते हैं या पंक्ति संख्या से पहले आप एक पूर्ण पंक्ति बनाते हैं। उदाहरण के लिए, कॉलम ए के लिए $ ए 1 पूर्ण है और पंक्ति 1 के लिए रिश्तेदार है, और ए $ 1 पंक्ति 1 के लिए पूर्ण है और कॉलम ए के सापेक्ष है। यदि आप पंक्तियों या नीचे कॉलम में सूत्र को कॉपी या भरते हैं, तो रिश्तेदार संदर्भ समायोजित होते हैं, और पूर्ण लोग समायोजित नहीं करते हैं।

b.

स्लाइड का ले आउट बदलना (Changing slide layout in Power Point)

यदि आप अपनी प्रेजेंटेशन कि किसी स्लाइड का लेआउट बदलना चाहते हैं तो स्लाइड या स्लाइड सॉर्टर व्यू में उस स्लाइड को सिलेक्ट करके फॉर्मेट मैन्यू में स्थित स्लाइड लेआउट ऑप्शन का चयन करें| इससे आपको स्लाइड लेआउट का डायलॉग बॉक्स दिखाई देने लगेगा अब आप जो भी लेआउट लेना चाहते हैं उसे सिलेक्ट कर लीजिए आप जैसे ही लेआउट सिलेक्ट करेंगे वह लेआउट आप की स्लाइड में जुड़ जाएगा |

Types of Layout in MS Power Point

1. Text layout
2. Content layout
3. Text and content layout
4. Other layout

1. Text layout

टेक्स्ट लेआउट का प्रयोग स्लाइड में केवल टेक्स्ट को जोड़ने के लिए किया जाता है इस लेआउट के द्वारा आप अपनी स्लाइड में केवल टेक्स्ट से संबंधित सामग्री जोड़ सकते है|

2. Content layout

कंटेंट लेआउट का प्रयोग स्लाइड में किसी भी प्रकार के कंटेंट को जोड़ने के लिए किया जाता है जैसे इमेज, टेबल, ऑडियो, वीडियो आदि को स्लाइड में डालने के लिए इस लेआउट का प्रयोग किया जाता हैं |

3. Text and content layout

टेक्स्ट एंड कंटेंट लेआउट का प्रयोग स्लाइड में टेक्स्ट के साथ-साथ किसी कंटेंट को भी जोड़ा जा सकता है इसके द्वारा हम स्लाइड में टेक्स्ट के साथ-साथ किसी इमेज, टेबल, ऑडियो, या वीडियो को शामिल कर सकते हैं |

4. Other layout

अदर लेआउट का प्रयोग स्लाइड में अन्य प्रकार के कंटेंट को जोड़ने के लिए किया जाता है |

c.

8.a

Assembler

सामान्‍यत:Assembly Language में लिखे प्रोग्राम को मशीनी भाषा में बदलने का काम Assembler करता है। ये एक एसा Software होता है, जो किसी Text File में लिखे गए विभिन्न Assembly Codes को Computer के समझने योग्‍य मशीनी भाषा में Convert करके Computer के CPU पर Process करता है। Computer का CPU उन Converted Codes को समझता है और हमें हमारा वांछित परिणाम उस भाषा में प्रदान करता है, जिस भाषा को हम समझ सकते हैं यानी CPU हमें हमारा processed result हमारे समझने योग्‍य English भाषा में प्रदान करता है।

Compiler and Interpreter

Compiler व Interpreter भी High Level Program Codes को मशीनी भाषा में बदलने का काम करते हैं। लेकिन दोनों के काम करने के तरीके में कुछ अन्तर हैं। Compiler पूरे प्रोग्राम को एक ही बार में मशीनी भाषा में बदल देता है व सारी की सारी गलतियों को एक ही बार में Programmer को दिखा देता है, जबकि Interpreter प्रोग्राम की हर लाइन को मशीनी कोड मे बदलता है और प्रोग्राम में जिस किसी भी Line की Coding में गलती होती है, Interpreter वहां पर एरर्‌ दे देता हैं व आगे Interpret नहीं होता है।

अन्‍य शब्‍दों में कहें तो क्‍योंकि Compiler एक ही बार में पूरे program को Machine Code में Convert कर देता है, इसलिए एक बार Source File के Compile हो जाने के बाद उस प्रोग्राम को दुबारा रन करने के लिए हमें उस Source File की जरूरत नहीं रहती। लेकिन Interpreter कभी भी अपनी Source File को पूरी तरह से Machine Code में Convert नहीं करता, इसलिए Interpreter Based Programs को जब भी रन किया जाता है, Interpreter को अपने Source Code File की फिर से जरूरत पडती है।

b.

E-commerce-

e-commerce शब्‍द “Electronic Commerce” का संक्षिप्त रूप है।

ई-कॉमर्स जिसे इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स के रूप में भी जाना जाता है, यह एक प्रोसेस हैं, जिसके द्वारा बिज़नेस और कन्‍जूमर एक इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से माल और सर्विसेस को बेचते और खरीदते हैं।

ई-कॉमर्स के प्रकार:

कई प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स हैं

सामान्यतया, जब हम ई-कॉमर्स के बारे में सोचते हैं, तब हम एक सप्लायर और क्लाइंट के बीच एक ऑनलाइन कमर्शियल ट्रैन्सैक्शन के बारे में सोचते हैं। हालांकि, यह विचार सही है, लेकिन वास्तव में ई-कॉमर्स को छह प्रमुख प्रकारों में बांट सकते हैं, सभी अलग-अलग विशेषताओं के साथ।

ई-कॉमर्स के 4 बुनियादी प्रकार हैं:

1) Business-to-Consumer (B2C):

इस बिज़नेस में एक बिज़नेस इंटरनेट पर प्रॉडक्‍ट या सर्विसेस को सिधे कन्‍जूमर को बेचता हैं।

उदाहरण के लिए आप Amazon, Flipkart या अन्‍य किसी साइट से कोई भी चीज खरीदते हैं।

2) Business-to-Business (B2B):

यहां कंपनियां इंटरनेट पर अन्य कंपनियों को प्रॉडक्‍ट या सर्विसेस को बेचती हैं।

इस प्रकार के ई-कॉमर्स में, दोनों पार्टिसिपेंट्स बिज़नेसेस होते हैं, नतीजतन, B2B e-commerce का वॉल्यूम और वैल्यू बहुत बड़ी हो सकती है।

3) Consumer-to-Consumer (C2C)

जब कन्‍जूमर अपने प्रॉडक्‍ट को किसी अन्‍य कन्‍जूमर को इंटरनेट पर बेचता हैं, तब इस ट्रैन्सैक्शन को Consumer-to-Consumer (C2C) कहा जाता हैं।

इसमें एक कन्‍जूमर अपनी पूरानी कार, बाइक जैसी अपनी प्रॉपर्टी को अन्‍य कन्‍जूमर को सिधे इंटरनेट के माध्‍यम से बेचता हैं।

आम तौर पर, ये लेन-देन थर्ड पार्टी के माध्यम से किया जाता है, जो ऑनलाइन प्लेटफार्म प्रदान करते है। इसके लिए Olx जैसी कई कंपनिया सर्विस के लिए कन्‍जूमर को चार्ज करती हैं या फ्री में सर्विस देती हैं।

4) Consumer-to-Business (C2B)

C2B में माल का आदान-प्रदान करने की परंपरागत समझ का एक पूर्ण उलट है।

इसका एक उदाहरण एक कन्‍जूमर वेब साइट बनाने के लिए ऑनलाइन रिक्वायरर्मन्ट देता हैं, और कई कंपनिया इसके लिए अच्‍छी किमत पर वेब साइट बनाकर देने के लिए ऑफर करती हैं। इसी तरह से हॉलिडे पैकेज या इन्शुरन्स भी इसके उदाहरण हो सकते हैं।

Advantages of e-commerce:

ई-कॉमर्स के फायदे:

1) सुविधा बढ़ाता है: ग्राहक अपनी सुविधा के अनुसार वस्तुओ की ऑर्डर अपने घर पर बैठ कर दे सकते हैं। और इसकी डिलेवरी उन्‍हे उनके घर पर ही मिल जाती हैं। यह उन लोगों के लिए सबसे अच्छा खरीदारी ऑप्‍शन है जो हमेशा व्यस्त होते हैं।

2) प्रॉडक्‍ट और किमत की तुलना कर सकते है: खरीदारी करते समय, ग्राहक उस वस्‍तू की किमत को कई बेव साइट पर तुलना कर सकता हैं, जिससे बेहतरीन प्रॉडक्‍ट पर उसे अच्‍छी डिल मिल जाती हैं।

इसके साथ ही वे डिस्‍काउंट और कूपन जैसे अतिरिक्त लाभों का आनंद ले सकते हैं।

3) स्‍टार्ट-अप के लिए आसान फंड: कई लोगों को बिज़नेस करने की इच्छा होती है, लेकिन शॉप लेने के लिए पर्याप्त कैपिटल नहीं होता। फिजिकल स्‍टोर लिज पर काफी महंगे होते है। ई-कॉमर्स, व्यापार को शुरू करने और बढ़ने के लिए आसान बनाता है।

4) प्रभावशाली: ट्रेडिशनल बिज़नेस में बिज़नेस की जरूरतों को पूरा करने के लिए बहुत सारे रिसोर्सेस खर्च हो जाते हैं और इससे प्रॉफीट कम हो जाता हैं।

ई-कॉमर्स में रिसोर्सेसे का कुशलता से उपयोग किया जाता है क्योंकि अधिकांश बिज़नेस सर्विसेस ऑटोमेटेड होती हैं।

5) कन्‍जूमर तक पहुंच: ट्रेडिशनल बिज़नेस जैसे की दुकान की पहुंच काफी सीमीत होती हैं, जबकी इंटरनेट के माध्‍यम से वही बिज़नेस दुनिया भर के कन्‍जूमर को अपने प्रॉडक्‍ट और सर्विसेस बेच सकते हैं।

6) प्रॉम्‍प्‍ट पेमेंट: ऑनलाइन स्टोर पर इलेक्ट्रॉनिक या मोबाइल ट्रांजेक्शन का उपयोग करते हुए पेमेंट फास्‍ट होता हैं।

7) विभिन्न प्रॉडक्‍ट को बेचने की योग्यता: इंटरनेट पर बिज़नेस फ्लेक्सिबल हो सकता हैं और बिजनेस एक साथ कई प्रॉडक्‍ट या सर्विसेस बेच सकते हैं।

Disadvantages of e-commerce:

ई-कॉमर्स के नुकसान:

1) खराब क्‍वालिटी वाले प्रॉडक्‍ट: आप इंटरनेट पर प्रॉडक्‍ट को देखकर चेक नहीं कर सकते हैं। इसलिए, झूठे माक्रेटिंग और खराब क्‍वालिटी के प्रॉडक्‍ट आपके घर पर आने का रिस्‍क बना रहता हैं।

हांल ही में मोबाइल के बॉक्‍स में मोबाइल की जगह पर साबुन आने की कई घटनाए सामने आई हैं।

2) अनचाही खरीद: ऑनलाइन स्टोर अपने प्रॉडक्‍ट को एक बड़ी संख्या में डिस्‍प्‍ले करते हैं और ऑनलाइन शॉपिंग की सुविधा के कारण, ग्राहक अनचाहे वस्‍तूए भी खरीद लेते हैं।

3) इंटरनेट स्कैमर: इंटरनेट एक अच्छी बात है, लेकिन कुछ लोगों ने इसका गलत कारणों से उपयोग करने का फैसला किया है। इंटरनेट पर किसी भी सामान को खरीदने से पहले उस वेब साइट और प्रॉडक्‍ट के बारें में जानकारी इकठठा करें।

4) सेल के बाद सपोर्ट की कमी: कई बार गलत या डिफेक्टिव प्रॉडक्‍ट आने पर उसकी कंम्‍प्‍लेट करने पर कन्‍जूमर को अच्‍छी सर्विस नहीं मिलती और इसके लिए उनका पैसा और समय बर्बाद हो जाता हैं।

5) माल की डिलिवरी में देरी हो सकती है: कभी-कभी प्रॉडक्‍ट की डिलीवरी में देरी हो जाती हैं और इससे कन्‍जूमर को असुविधा के साथ नुकसान भी हो सकता हैं।

6) सुरक्षा: ऑनलाइन प्रॉडक्‍ट खरीदने के लिए आपको अपने पर्सनल डिटेल्‍स के साथ क्रेडिट कार्ड की जानकारी भी देनी होती हैं। लेकिन कभी-कभी यह इनफॉर्मेशन चोरी होने का खतरा भी बना रहता हैं।

Features Of E-Commerce:

ई-कॉमर्स की विशेषताएं:

Ubiquity:

ई-कॉमर्स हर जगह और हर समय उपलब्ध होता है। कन्‍जूमर किसी भी समय अपने घर या ऑफिस से इंटरनेट कनेक्शन के माध्‍यम से प्रॉडक्‍ट खरीद या बेच सकते हैं।

Global reach:

ई-कॉमर्स पारंपरिक सांस्कृतिक और राष्ट्रीय सीमाओं के पार फैल सकता हैं और दुनिया भर के कन्‍जूमर बिज़नेस से कनेक्‍ट होते हैं।

ई-कॉमर्स वेबसाइट पर अब बहुभाषी अनुवाद करने की क्षमता होती है।

Universal standards:

यहां पर एक ही स्‍डैडर्ड का इस्‍तेमाल किया जाता हैं, जिसे इंटरनेट स्‍डैडर्ड कहां जाता हैं। इन स्‍डैडर्ड को दुनिया भर के सभी देशों द्वारा शेयर किए जाते हैं।

Richness:

एडवरटाइजिंग और ब्रांडिंग कॉमर्स का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ई-कॉमर्स वीडियो, ऑडियो, एनीमेशन, बिलबोर्ड, साइन और आदि डिलीवर कर सकते हैं। हालांकि, यह टेलीविजन टेक्‍नोलॉजी के रूप में समृद्ध है।

Interactivity:

ई-कॉमर्स टेक्‍नोलॉजी में मर्चंट और कन्‍जूमर के बीच दो-तरफ़ा कम्‍युनिकेशन होता हैं। आप ई-मेल या कॉल के द्वारा कम्‍युनिकेशन कर सकते हैं।

Information density:

अब सभी मार्केट में हिस्‍सा लेने वालों के बिच इनफॉर्मेशन कि क्‍वालिटी बेहद बढ़ी है। ऑनलाइन शॉपिंग प्रोसेस में कन्‍यूजर के पर्सनल डिटेल्‍स, प्रॉडक्‍ट की जानकारी और पेमेंट की जानकारी मर्चंट तक पहुंचती हैं और कन्‍जूमर को प्रॉडक्‍ट की जानकारी मिलती हैं।

Personalization/Customization:

किसी व्यक्ति के नाम, इंटरेस्‍ट और पिछली खरीदारी के आधार पर मैसेज विशिष्ट व्यक्ति को भेजा जा सकता हैं।

Social technology:

सोशल नेटवर्क पर कन्‍जूमर इनफॉर्मेशन को शेयर करते हैं और मर्चंट सोशल नेटवर्क पर उनके प्रॉडक्‍ट की एडवरटाइजिंग करते हैं।

E-commerce in India:

भारत में ई-कॉमर्स:

वर्ष 2009 में भारत का ई-कॉमर्स बाजार लगभग 3.9 अरब डॉलर था, जो 2013 में 12.6 अरब डॉलर रहा। 2016-17 में ऑनलाइन बाजार में 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी।

भारत में जुलाई 2017 तक लगभग 450 मिलियन का इंटरनेट यूजर बेस है, जो आबादी का 40% हिस्सा है। दुनिया में दूसरी सबसे बड़ा यूजर बेस बनने के बावजूद, चीन (650 मिलियन, आबादी का 48%) के पीछे, संयुक्त राज्य अमेरिका (266 मिलियन, 84%) या फ्रांस (54 मिलियन, 81%) के बाजारों की तुलना में भारत में ई-कॉमर्स कम है।

लेकिन भारत में ई-कॉमर्स एक अभूतपूर्व दर से बढ़ रहा है, जो हर महीने लगभग 6 मिलियन नए सदस्य को जोड़ता है।

एक अनुमान के अनुसार इस वित्त वर्ष में भारत के ई-कॉमर्स मार्केट में 2 लाख करोड़ रुपये का इजाफा होगा।

c.

Advantages-

1. चयन क्वेरी को तेज करें।
2. एक पंक्ति अद्वितीय या डुप्लिकेट के बिना (प्राथमिक, अद्वितीय) बनाने में मदद करता है।
3. अगर इंडेक्स भरने-पाठ सूचकांक पर सेट है, तो हम बड़े स्ट्रिंग मानों के खिलाफ खोज सकते हैं।
4. उदाहरण के लिए वाक्य से एक शब्द खोजने के लिए।

Disadvantages-

1. इंडेक्स अतिरिक्त डिस्क स्थान लेते हैं।
2. इंडेक्स धीमा हो जाता है, अपडेट और डिलीट करता है, लेकिन अगर WHERE स्थिति में अनुक्रमित फ़ील्ड है तो अपडेट अपडेट हो जाएगा। इंसर्ट, अपडेट और डिलीट धीमा हो जाता है क्योंकि प्रत्येक ऑपरेशन पर इंडेक्स को भी अपडेट किया जाना चाहिए।

9.a.

b.

c.

OCR क्या है:

OCR या Optical Character Recognition, एक तकनीक है जो आपको विभिन्न प्रकार के डयॉक्‍युमेंटस् को कन्‍वर्ट करना एनेबल करती है। इस टेक्‍नोलॉजी से स्कैन किए गए पेपर डयॉक्‍युमेंटस्, पीडीएफ फाइलें या एक डिजिटल कैमरे से लिए गए इमेजेस को एडिट और सर्च करने योग्य डेटा में कन्‍वर्ट किया जा सकता हैं।

तकनीकी रूप से, OCR, हैंडराइटिंग, प्रिंटेड या टाइप किए गए टेक्‍स्‍ट कि इमेजेस के इलेक्ट्रॉनिक या मैकेनिकल वर्जन को मशीन-एन्कोडेड टेक्स्ट में कन्‍वर्ट करते हैं।

OCR कैसे काम करता है:

जब एक प्रिंटेड या हैंडराइटिंग पेज को स्कैन किया जाता है, तो उसे JPG या TIF फॉर्मेट फ़ाइल के रूप में सेव किया जाता है। इस इमेज को ओपन कर आप मॉनिटर पर इसके अंदर के टेक्‍स्‍ट को पढ़ सकते हैं। हालांकि, कंप्यूटर के लिए यह केवल ब्‍लैंक एंड वाइट डॉटस् की सीरीज है।

इसका मतलब है कि स्‍कैन किए गए डयॉक्‍युमेंट के सभी टेक्‍स्‍ट आपके कंप्यूटर के लिए केवल एक डॉट्स की एक इमेज है।

OCR सॉफ्टवेयर इन इमेजेस की हर लाइन को देखता है और यह निर्धारित करता है कि डॉट्स की यह सीरीज एक विशेष नंबर या टेक्‍स्‍ट से मेल खाती है।

MICR-

बैंकों द्वारा इस MICR CODE का उपयोग चेक पास करने में किया जाता है, MICR CODE के जरिये चेक की सुरक्षा बढ़ जाती है. MICR Code को पढने के लिए MICR reader का उपयोग किया जाता है 
MICR code नौ अंको का होता है जिसमे पहले 3 अंक शहर का नाम अगले तीन अंक बैंक का नाम और अंतिम तीन अंक बैंक की ब्रांच के बारे में बताते है|

About the Author: virag

Hello!!!... दोस्तों, आप सभी का इस ब्लॉग पर स्वागत है मेरा नाम विराग सम्बरिया है, और मैं पेशे से एक Computer Teacher हूँ मैं सन २०१० से यह कार्य कर रहा हूँ, और मुझे इस कार्य को करने में अत्यंत संतुष्टि प्राप्त होती है, एक तो इसके माध्यम से मैं अपने ज्ञान और अनुभव का लाभ अन्य लोगों तक पहुंचा पाता हूँ और दूसरा इसके माध्यम से मैं खुद भी अपने ज्ञान में वृद्धि करता हूँ. Thanks a Lot..... आपके इस Blog को Visit करने पर सहृदय धन्यवाद् !!!!!!

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